मन में रखो विश्वास - मनीष मेहरोत्रा

मन में रखो विश्वास करते रहो निरंतर प्रयास ;
परिणाम की इच्छा ना भटकने दो आस पास।

आशाओं के दीप जलाते रहो ;
साथ साथ आज को आज की तरह अपनाते रहो।

सपना जो तुमने आज बुना है , वो कल अवश्य पूरा होगा ;
बस धीरज से काम लेना होगा।

याद रखो कि समय है बहुत बलवान ;
आदमी आज फ़क़ीर तो कल है धनवान।

जो तुमने हिम्मत से लिया काम ;
तो एक दिन अवश्य मिलेगा तुम्हें तुम्हारा धाम।

यह भी जानो की यह संसार माया की छाया है ;
मनिषयों ने सत्य को इसके पीछे ही छिपे पाया है।

धन , शक्ति और मान, यह तीनो है ईश्वर के वरदान ;
इनके कारण कभी ना करना तुम अभिमान , और इनके लिए कभी ना खोना अपना स्वाभिमान।

अपने आत्मा बल को बनाए रखो
जीवन में हौसले की शक्ति जगाए रखो ;
बहती हुई नदियों ने हमें दिखाया है ,  उन्हो ने अपना रास्ता स्वयं ही बनाया है।

उगता हुआ सूरज है इस बात का पैग़ाम ;
जीवन ऊँचे उठने का ही है नाम।

मन में रखो विश्वास करते रही निरंतर प्रयास ;
परिणाम की इच्छा ना भटकने दो आस पास।

स्व रचित
शिमला
२/८/१९९२
प्रा: ११.२५ मिनट 

Comments

  1. nice poem sir,
    azmato ki manzil to azmato se milti hai ,
    aediya badhane se qad nhi bhadha karte.
    High Court Advocate in Lucknow and all legal community respect that feelings.

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